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इस eco-friendly pen से सिर्फ पांच रुपए में कम करिए pollution का खतरा

eco-friendly बेड, परदे, फुटवियर्स, बैग़ तो सुना होगा आपने! क्या कभी eco-friendly pen सुना है? नहीं सुना, तो अब सुन लो और खरीद भी आना आज ही। ये सबसे ज्यादा ज़रूरी था कि स्टेशनरी की चीज़ें eco-friendly बनाई जाएं, खासकर पेन और पेंसिल, क्योंकि ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती हैं।

ऐसी चीज़ें इस्तेमाल के बाद फेंक दी ज्यादा जाती हैं। पहले इंक खत्म होने पर रिफिल खरीदकर पेन में लगाई जाती थी। अब लोग सोचते हैं, रिफिल कौन खरीदे, उतने में तो पेन ही आ जाएगा। यही कारण है कि दुकानदारों ने रिफिल बेचना छोड़ दिया।

प्लास्टिक की पेंस pollution का बड़ा कारण हैं और इन्हें रिसाइकल भी नहीं किया जा सकता। इसका समाधान खोज निकाला है उड़ीसा के दो छात्रों प्रेम पांडेय और अहमद रज़ा ने। इन दोनों ने न्यूज़पेपर, फल और फूलों के बीजों से eco-friendly pen बनाए हैं, जिनकी कीमत पांच से सात रुपए है।

दरअसल प्रेम और अहमद ने अपना स्टार्टअप शुरू किया है, जिसमें वो ईको-फ्रेंडली पेन बना रहे हैं। इस कम्पनी का नाम उन्होंने ‘लिखना’ रखा है। प्रेम ने बताया, हालांकि ये पेंस पूरी तरह प्लास्टिक-फ्री नहीं हैं, क्योंकि इनकी रिफिल प्लास्टिक की है। अहमद का कहना है कि लोग इन पेंस को यूज़ करने के बाद मिट्टी में फेंक सकते हैं या किसी गमले में दबा सकते हैं।

ये पेंस केवल भारत नहीं, जर्मनी और आस्ट्रेलिया में भी काफी पसन्द की जा रही हैं, वहां के बाज़ारों में भी उपलब्ध है।

देखा जाए तो ये ईको-फ्रेंडली पेंस बहुत महंगी नहीं हैं। कोई भी आसानी से खरीद सकता है। दो-चार रुपए जोड़ लोगे, तो pollution का खतरा टाल सकते हो। अरे! स्टाइलिश भी बहुत है, ज़रा एक-दो eco-friendly खत भी लिख कर देखो, फिर बताना।

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