Monday , September 16 2019

ये कैसा साया है दुनिया पर, बुढ़ापे का!

यूं देखा जाए तो population control पर सालों से बात हो रही है। population day पर स्कूल में हर साल पेंटिंग बनवा दी जाती है और फिर वह किसी कोने में रद्दी के भाव में पड़ी रहती है। परिवार नियोजन की जानकारी देने के लिए गांवों में समय-समय पर कैम्प लगाए जाते हैं। सड़कों पर लगे पोस्टर्स बताते हैं कि जनसंख्या पर नियंत्रण कितना ज़रूरी है। हां! इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इन बातों का असर तो हुआ है समाज में, पर कहीं न कहीं education एक बड़ा कारण है इसके पीछे। खैर, population control से बच्चों के पैदा होने का अनुपात तो control में है, लेकिन बूढ़ों की संख्या बढ़ गई है।

ये बात थोड़ी अटपटी जरूर लग सकती है, लेकिन सौ आने सच है। 11 जुलाई को हर साल world population day मनाया जाता है। दरअसल, यूएन के मुताबिक 65 साल से ज्यादा के लोगों की संख्या 5 साल तक के बच्चों से अधिक हो गई है। इतना ही नहीं, 2050 तक बुजुर्गों की संख्या बच्चों से दोगुनी हो जाएगी। आंकड़े यह भी बताते हैं कि 2027 में भारत की आबादी 145 करोड़ हो जाएगी, जो चीन से अधिक होगी। हालांकि ये कुछ नया या पहली बार नहीं होगा, 12000 हजार साल के भीतर 6200 साल में भारत की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा रही है।

वैसे ये बात कुछ हज़म नहीं हो रही है कि बुजुर्गों की आबादी अब दुनिया में सबसे ज्यादा होगी। तो क्या हम ये मान लें कि दुनिया अब बूढ़ी हो रही है? घुटनों में एक बार दर्द हो जाए, तो इलाज करवाया जा सकता है, लेकिन आने वाले समय में अगर देश का एक भी पिलर कमजोर पड़ा, तो उसे सम्भालना मुश्किल हो जाएगा।

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