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इस बार गर्मियों में इन लोगों से नहीं मिल पाएंगे आप

हमारे देश में बच्चे के पैदा होने से लेकर किसी बुजुर्ग के मरने तक पर लोग टिप्पड़ी कर डालते हैं। हालांकि लोगों के भारी ज्ञान की इतनी जरूरत नहीं होती है, लेकिन भाई साहब! इण्डिया में मुफ्त का ज्ञान बांटने वाले बहुत बैठे हैं। इन सबमें अफवाहें फैलाने वालों को भला हम कैसे भूल सकते हैं। ये बीच में बिलकुल pendulum का काम करते हैं।

ऐसी ही कुछ अफवाहों का चलन लगभग हर साल गर्मियों में होता है। इस बात से अन्दाजन आपको कुछ तो याद आया ही होगा। क्यों? ये गर्मियां कुछ सूनी सूनी नहीं निकल रहीं? कोई नया super manया monkey man अब तक नहीं आया?

चलिए दोहराते हैं कुछ पुराने किस्से, जो शायद आपने सुनें हो पर इसपर गौर न किया हो।

एक आया था मुंहनोचवा

मुंहनोचवा की अफवाह 2002 में कानपुर से शुरु हुई थी। कुछ लोग कहते थे कि मुंहनोचवा लोमडी जैसा दिखता है, तो कुछ लोगों का मानना था कि यह कोई मशीन से चलने वाला जीव है, जिसकी आंखे लाल और पूंछ हरे रंग की है। यह अफवाह बहुत लम्बे समय तक चली पर इस बात का पता नहीं चला कि मुंहनोचवा कौन था और कहां गया?

Monkey man

मुंहनोचवा की तरह ही मंकी मैन भी आया और चला गया। यह अफवाह दिल्ली के लोगों ने शुरु की थी। उनका कहना था कि मंकी मैन अपने हाथों में लोहे के पंजे पहनता है और छतों पर चढ़कर लोगों को अपना निशाना बनाता है। इसके बाद मंकी मैन कहां गायब हो गया, ये आजतक किसी को पता नहीं।

चोटी काटने वाली

इस अफवाह से तो सभी वाकिफ होंगे क्योंकि ये बहुत लम्बे समय तक चली थी और काफी लोग इसका शिकार हो गए थे। यूपी, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में ऐसे लाखों किस्से सुनने में आए थे, जिसमें औरतों और लड़कियों की चोटियां कटी थी और बाकी अफवाहों की तरह यह भी उड़न छू हो गया।

दरवाजा खटखटाने वाली चुड़ैल

90 के दशक में यह अफवाह बैंगलोर में फैली थी कि एक चुड़ैल लोगों का दरवाजा खटखटाती है, अगर आपने दरवाजा खोल दिया, मतलब अपनी मौत को न्योता दे दिया। लोग अपने घरों के दरवाजों पर ‘नाले बा’ लिखते थे, जिसका मतलब है ‘कल आना’। ऐसा करने से वह उनके घरों में नहीं जाती थी। इस वजह से कर्नाटक में लोग हर साल ‘नाले बा डे’ भी मनाते हैं। 2018 में ऐसी ही एक फिल्म भी बनी थी, स्त्री, जिसका कांसेप्ट बिलकुल यही था। इस फिल्म में राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर ने लीड रोल्स प्ले किया था।

स्टोनमैन

1988 में महाराष्ट्र में स्टोनमैन को लेकर तहलका मचा हुआ था। एकाएक 12 लोगों की मौत एक ही तरीके से हुई थी। ये बेघर लोग थे, जो सड़कों पर रहते थे। इनको बेदर्दी से सिर कुचलकर मारा गया था, जो कि पत्थर से कुचले हुए लग रहे थे। इसके बाद स्टोनमैन जैसे कहीं लुप्त हो गया लेकिन यह अंत नहीं था। 1989 में फिर से स्टोनमैन का खौफ शुरु हुआ और इस बार निशाने पर था सिटी आफ जाय यानी “कोलकाता”। यहां 13 लोगों की मौत हुबहु वैसे ही हुई, जैसे एक साल पहले महाराष्ट्र में हुई थी। घटनाएं तो चौंका देनेवाली थी पर स्टोनमैन  भी स्टोन बनके रह गया और आजतक उसका कुछ पता नहीं चला। इसपर 2009 में मनीष गुप्ता की एक फिल्म भी बनीं सीरियल किलर स्टोनमैन।

बात बस इतनी है कि मुंहनोचवा हो या मंकी मैन या फिर स्टोनमैन, ऐसा लगता है किसी ने मौत के अलग अलग नाम रख दिए हो।

यूपी और बिहार तो अफवाहों का गढ़ है। कोई बात गलती से भी किसी के मुंह से निकल जाए, तो उसे हवा में उड़ते देर नहीं लगती। शायद यही कारण है कि इन अजीब से नाम वाले लोगों का कोई आस्तित्व नहीं है और आजतक इनका कुछ पता नहीं चल पाया है।    

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