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ब्रह्मपुत्र नदी के जरिए भूटान और बांग्लादेश को जोड़ेगा भारत

बांग्लादेश और भूटान को नजदीक लाने के लिए भारत अब सेतु का काम कर रहा है।

दोनो देशों को जोड़ने के लिए भारत ने ब्रह्मपुत्र नदी का एक रास्ता खोला दिया है। जिसके चलते बांग्लादेश और भूटान के बीच व्यापार आसान हो जाएगा।

Birbhum: Prime Minister Narendra Modi speaks with his Bangladeshi counterpart Sheikh Hasina during the annual convocation of Visva Bharati University, in Birbhum, on Friday. (PTI Photo/Ashok Bhaumik) (PTI5_25_2018_000054B)

भारत सरकार की इस नई पहल को शुक्रवार को असम से अमली जामा पहनाया गया।

असम के धुबरी रिवरपोर्ट से ऐसी पहली शिप बांग्लादेश के नारायणगंज के लिए रवाना हुई। इस शिप में भूटान से आया हुआ 70 ट्रकों के बराबर क्रश्ड स्टोन भरा हुआ था। इन क्रश्ड स्टोन को ट्रकों के जरिए भूटान के फुएंतशिलिंग से असम के धुबरी जेटी तक लाया गया था। जिसे बाद में बांग्लादेश के लिए रवाना कर दिया गया।

ब्रह्मपुत्र के इस नए रूट को राष्ट्रीय जलमार्ग-2 का नाम दिया गया है।

ब्रहमपुत्र का रूट

ब्रह्मपुत्र नदी चीन से निकलते हुए अरूणांचल प्रदेश में हिन्दुस्तान की सरजंमी को छूती है। जहां से ब्रह्मपुत्र कई सह नदियों को अपने में समाहित करते हुए असम के रास्ते बांग्लादेश में गंगा नदी की पदमा नामक शाखा से जुड़ जाती है। जहां से थोड़ी दूर पर ही दोनों नदियां बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है।  

असम में शिप को हरी झंडी दिखाते हुए शिपिंग मंत्री मनसुख लाल मंडाविया ने बताया, ‘यह पहली बार है कि जब भारत के जलमार्ग को दो देशों को जोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।’

IWAI (भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण) के चेयरमैन प्रवीर पांण्डेय के मुताबिक असम से बांग्लादेश की दूरी करीब 600 किमी है, जिसे पूरा करने में शिप को करीब 6 दिनों का समय लगेगा।

इससे पहले ट्रकों से होता था भूटान और बांगलादेश का व्यापार

अभी तक भूटान और बांग्लादेश का व्यापार ट्रकों के जरिए होता था, लेकिन उसमें कई दिक्कतें आती थीं। ट्रकों के जरिए आने वाले माल को बांग्लादेश की सीमा पर रोक दिया जाता था और फिर उसे बांग्लादेश के ट्रकों में भरा जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 10 दिन का समय लगता था। जलमार्ग के जरिए दोनों देशों की परिवाहन लागत में 30 फीसदी की कमी आएगी।

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