Monday , September 16 2019

Bollywood Movies के नामों की इतनी ‘बड़ी’ बात आप से क्यों छुपाई गई?

एक दौर था जब फिल्मों के नाम गाने जितने होते थे, राम तेरी गंगा मैली हो गई, तू बाल ब्रह्मचारी, मैं हूं कन्या कुंवारी, अल्लाह मेहरबान तो गधा पहलवान, ऐसे नामों वाली होती थीं पहले की फिल्में। आदमी नाम से ही समझ जाए कि कहानी में क्या होगा।

आज का दौर भी इससे कुछ ज्यादा अलग नहीं है। 2018 और 2019 में कुछ ऐसी फिल्में आईं, जो लोगों ने बेहद पसन्द की। शादी में ज़रूर आना, वीरे दी वेडिंग, उरी- द सर्जिकल स्ट्राइक, सोनू के टीटू की स्विटी, स्टूडेंट आफ द इयर 2. ये वो बड़े नामों वाली फिल्में थीं, जो न सिर्फ लोगों ने पसन्द की, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुईं।

अब जो फिल्में बन रही हैं, वो ज्यादातर वन वर्ड की हैं। राज़ी, भारत, कलंक, केसरी, बदला, कबीर सिंह जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर धमाकेदार प्रदर्शन किया। क्या यही कारण है कि अब फिल्मों के टाइटल्स छोटे हो रहे हैं या हम ये समझ लें कि प्रोड्यूसर्स और डायरेक़्टर्स वन वर्ड फैक्टर को लकी चार्म मानने लगे हैं।

बड़ी और छोटी फिल्मों के टाइटल्स का ये उलट-फेर तो चलता रहेगा। ऑडियंस को  बस सही मात्रा में entertainment मिलते रहना चाहिए और फिल्में बेवजह की कांट्रोवर्सी से दूर रहें, जो की सबसे बड़ी समस्या है। फिल्म का पोस्टर रिलीज़ होते देर नहीं लगती और ख्‍वाह-म-ख्‍वाह controversy का पंचनामा शुरू हो जाता है।

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